मध्यप्रदेश विधानसभा की कार्यवाही 13 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई है। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का शुक्रवार को पांचवां दिन था। लगातार चल रहे विधानसभा में आज भी हंगामे के आसार थे। कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी को विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया था। इसके बाद से ही विपक्ष एक जुट होकर विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया। नेता प्रतिपक्ष डा. गोविंद सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ सहित कांग्रेस के सभी विधायकों ने जीतू पटवारी के समर्थन में सदन में लड़ाई लड़ने का ऐलान किया था। शुक्रवार को विधानसभा में विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। भारी हंगामे के बाद कार्यवाही थोड़ी देर के लिए स्थगित की, फिर विपक्षी विधायक हंगामा करने लगे। 27 फरवरी से शुरू हुआ विधानसभा का बजट सत्र 27 मार्च तक चलने वाला है। अब विधानसभा का सदन सोमवार 13 मार्च को 11 बजे शुरू होगा।
नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा, हम संसदीय कार्यमंत्री के विरुद्ध अवमानना प्रस्ताव लाएंगे
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश विधानसभा में आज कांग्रेस पार्टी के विधायक जीतू पटवारी के निलंबन के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्ताव पर कुल 48 विधायकों के हस्ताक्षर हैं। नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर गोविंद सिंह ने बताया कि, आज बजट सत्र के पांचवें दिन स्पीकर गिरीश गौतम के खिलाफ कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा, सदन में, मैं स्पीकर से पूछ रहा था कि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा कब कराएंगे? इसी बीच संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने नियम संचालन पुस्तिका मेरी ओर जोर से फेंककर मारी। नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा, हम संसदीय कार्यमंत्री के विरुद्ध अवमानना प्रस्ताव लाएंगे। इस प्रकार के मंत्री को सदन में बैठने का अधिकार नहीं है।
संसदीय कार्यमंत्री ने कहा, अविश्वास प्रस्ताव लाना ही था तो मेरे खिलाफ लाते
नेता प्रतिपक्ष के आरोप पर नरोत्तम मिश्रा ने कहा, मैंने किताब नहीं मारी। मैं चपरासी को हटा रहा था। संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा, अविश्वास प्रस्ताव लाना ही था तो मेरे खिलाफ लाते। मूल कार्य तो संसदीय कार्यमंत्री का था। डॉ मिश्रा ने कहा कि पिछले 3 साल में इस सदन में कोई सार्थक बहस नहीं हुई है। कांग्रेस पार्टी के विधायक सदन में अपनी बात रखना ही नहीं चाहते। वह हमारी बात सुनते ही हंगामा करने लगते हैं। सदन स्थगित करना पड़ता है या फिर वह लोग वॉकआउट करके चले जाते हैं।