ब्रेकिंग
पीकअप से घसीटकर हत्या करने वाले आरोपी छीतर जयराम गुर्जर को आजीवन कारावास कब्जे से सट्टा अंक लिखी पर्ची, लीड पेन एवं नकदी राशि जब्त राहुल गांधी के खिलाफ टिप्पणी पर कांग्रेस की कार्रवाई, वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ चुके नेताजी की प्राथम... सीतामऊ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 529 किलो 690 ग्राम डोडाचूरा जब्त रीवा से भोपाल और कोलकाता को हवाई सेवा की मिली सौगात, विन्ध्य का वर्षों से संजोया हुआ हवाई सेवा का सप... “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा”-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में निकाली तिरंग... मंदसौर में फिर गरमाई सियासत, भाजपा पदाधिकारी को फोन पर गाली-गलौज और धमकी का मामला दर्ज मंदसौर जिला पुलिस की बड़ी कार्रवाई, जुआ-सट्टा और अवैध शराब के खिलाफ अभियान तेज मध्यप्रदेश विकास के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिलः उपमुख्यमंत्री देवड़ा एसपी के निर्देशन में मंदसौर पुलिस की सट्टा-जुआ के खिलाफ कार्रवाई, चार प्रकरणों में 7 आरोपी गिरफ्तार,...

रिश्वत लेने से पहले फरार हुआ पटवारी, लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया

भोपाल। मध्यप्रदेश, झाबुआ, 26 जून 2026। लोकायुक्त इंदौर की टीम रिश्वतखोर पटवारी को रंगे हाथ गिरफ्तार करने के लिए झाबुआ पहुंची, लेकिन आरोपी रिश्वत लेने निर्धारित स्थान पर नहीं पहुंचा। आशंका है कि उसे लोकायुक्त की कार्रवाई की भनक लग गई थी। हालांकि, पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।

खसरा-खतौनी अपडेट करने के बदले मांगी थी 20 हजार रुपये की रिश्वत

लोकायुक्त के अनुसार, शिकायतकर्ता देवा मेडा (34) निवासी ग्राम सुरडिया, तहसील राणापुर, जिला झाबुआ ने शिकायत दर्ज कराई थी। उनके ताऊ के निधन के बाद कृषि भूमि के बंटवारे के लिए खसरा-खतौनी अपडेट कराया जाना था। आरोप है कि संबंधित हल्का पटवारी संदीप पवार ने यह कार्य करने के एवज में 20,000 रुपये रिश्वत की मांग की।

ऑडियो रिकॉर्डिंग में रिश्वत मांगने के मिले साक्ष्य

शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त ने उसका सत्यापन कराया। शिकायतकर्ता और पटवारी के बीच हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग में कथित रूप से रिश्वत की मांग तथा रिश्वत नहीं देने पर नियमानुसार काम नहीं करने की बात रिकॉर्ड हुई। इसके आधार पर लोकायुक्त ने ट्रैप की योजना बनाई।

ट्रैप के दौरान नहीं पहुंचा आरोपी

लोकायुक्त की टीम ने शिकायतकर्ता को केमिकल लगे नोट देकर तय स्थान पर भेजा। टीम के सदस्य सिविल ड्रेस में आसपास तैनात रहे, लेकिन आरोपी पटवारी मौके पर नहीं पहुंचा। बाद में उसका मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ मिला। प्रारंभिक तौर पर माना जा रहा है कि उसे लोकायुक्त की कार्रवाई की जानकारी मिल गई थी।

इस ट्रैप दल में कार्यवाहक निरीक्षक सचिन पटेरिया, कार्यवाहक प्रधान आरक्षक रणजीत द्विवेदी एवं विवेक मिश्रा, आरक्षक विजय कुमार, आशीष नायडू तथा कृष्ण अहिरवार शामिल थे।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज

रंगे हाथ गिरफ्तार नहीं हो पाने के बावजूद लोकायुक्त ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी पटवारी संदीप पवार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित) की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है।

लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में केवल रंगे हाथ गिरफ्तारी ही अभियोजन का आधार नहीं होती। यदि रिश्वत मांगने के पर्याप्त साक्ष्य, जैसे ऑडियो रिकॉर्डिंग, स्वतंत्र गवाहों के बयान और सत्यापन रिपोर्ट उपलब्ध हों, तो उनके आधार पर भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.