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अफीम पोस्त की खेती प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल करने की मांग उठ रही, मंदसौर के मल्हारगढ़ क्षेत्र में ओलावृष्टि ने अफीम-गेहूं समेत फसलें बर्बाद, जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र सिंह गुर्जर बोले- सरकार दे तुरंत मुआवजा.!

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत मुख्य रूप से खाद्य फसलें, तिलहन और वार्षिक वाणिज्यिक/बागवानी फसलें शामिल हैं तो फिर अफीम पोस्त की खेती फसल क्यों नही.?

close-up image of the beautiful summer flowering red opium poppy and seed heads also known as papaver somniferum - opium poppy stock pictures, royalty-free photos & images

चावल/धान, गेहूं, मक्का, बाजरा, ज्वार, सोयाबीन, मूंगफली, सरसों, सूरजमुखी, और अरंडी कपास, गन्ना, आलू, प्याज, मिर्च, अदरक, हल्दी, लेकिन अफिम फसल बीमा येजना मे शामिल नही है, जबकि अफीम पोस्त की खेती फसल केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो द्वारा जारी लाइसेंस फसल है, इस अफीम पोस्त की खेती फसल को भी फसल बीमा मे षालि किया जाना आज की महती आवश्यकता है।
केन्द्र सरकार और उनके प्रतिनिधत्व करने वाले सांसंद, राज्यसभा सदस्य अफीम की खेती के लिए वार्षिक लाइसेंसिंग नीति बनाते सयत उच्च उपज देने वाले किसानों पर ध्यान केंद्रित करें और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को प्रोत्साहित करें। डिजिटलीकरण सीमांत किसानों के लिए पारदर्शिता और समावेशिता सुनिश्चित हो। फसल अफीम की खेती का प्रधामंत्री फसल बीमा योजना मे शामिल किया जावे यह मांग मंदसौर नीमच जिला क्षेत्र के अफीम कास्तकारों द्वारा की जा रही है।

तरबूज़ और कॉलार्ड ग्रीन की फ़ोटो हो सकती है

नीमच और मंदसौर जिलों से आ रही यह खबर वास्तव में किसानों के लिए बहुत हृदयविदारक है। अफीम की खेती में लागत और मेहनत दोनों बहुत अधिक लगती है, और फसल के इस महत्वपूर्ण पड़ाव (फूल आने के समय) पर प्राकृतिक आपदा का आना एक बड़ी आर्थिक क्षति है।

मध्यप्रदेश मे मंदसौर जिले में रविवार को मौसम ने अचानक करवट ले ली। जिले के मल्हारगढ़ तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश, आंधी और ओलावृष्टि देखने को मिली। मंदसौर जिले के अनेक क्षेत्रों में तेज बारिश हुई, जबकि मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम झारड़ा सहित आसपास के गांवों में ओलावृष्टि के दृश्य सामने आए। मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ क्षेत्र में रविवार दोपहर अचानक मौसम ने करवट ले ली और तेज आंधी के साथ बारिश व ओलावृष्टि शुरू हो गई. झारड़ा, काचरिया देव, किशनगढ़, मनासा खुर्द, हरमाला, अरनिया देव, पामाखेड़ा सहित आधा दर्जन से अधिक गांवों में करीब 10 से 20 मिनट तक हुई मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी. कई गांवों में ओले गिरने से घरों और सड़कों पर सफेद चादर जैसी स्थिति बन गई. तेज बारिश और ओलावृष्टि के कारण किसानों की खड़ी फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है,

रविवार शाम करीब आधे घंटे तक तेज बारिश के साथ ओले गिरे, जिससे सड़कों और खेतों में बर्फ जैसी सफेद चादर बिछ गई। कई स्थानों पर लोग घरों के आंगन में फावड़े से ओले समेटते नजर आए। मंदसौर जिले की सीमा से लगे ग्राम पालसोडा और भंवरासा क्षेत्र में भी ओलावृष्टि हुई, जहां का नजारा मिनी कश्मीर जैसा दिखाई दिया। अचानक बदले मौसम से किसानों की चिंता बढ़ गई है। बारिश और ओलावृष्टि के कारण कई इलाकों में अफीम सहित गेहूं चना की फसल आड़ी हो गई, जिससे नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

असर पड़ा है. किसानों का कहना है कि यदि जल्द सर्वे नहीं हुआ तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. मामले में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने संज्ञान लिया है. उन्होंने जिला कलेक्टर अदिति गर्ग को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित गांवों में अधिकारियों की टीम भेजकर जल्द से जल्द फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए. साथ ही किसानों को चिंता न करने का भरोसा दिलाते हुए उचित राहत दिलवाने की बात कही है. प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई की जा रही है,

मौसम विभाग ने नीमच, मंदसौर सहित 14 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। अगले 24 घंटे तक प्रदेश के कई हिस्सों में बादल और कोहरे की स्थिति बने रहने की संभावना है।

 

 

मंदसौर के मल्हारगढ़ क्षेत्र में ओलावृष्टि ने अफीम-गेहूं समेत फसलें बर्बाद, जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र सिंह गुर्जर बोले- सरकार दे तुरंत मुआवजा.!

प्रकृति का कहर: मनासाखुर्द से जार्डा तक फसलें नष्ट, कांग्रेस अध्यक्ष गुर्जर ने की 2 लाख प्रति एकड़ मुआवजे की मांग
अफीम उत्पादकों पर सबसे भारी मार!
मल्हारगढ़ में ओले-बारिश से फसलें चौपट, श्री गुर्जर ने नारकोटिक्स विभाग से विशेष राहत की अपील

मन्दसौर। जिले के ब्लॉक मल्हारगढ़ में मनासाखुर्द, गोपाल पूरा, जार्डा, हरमाला आदि गांवो में  किसानों पर प्रकृति का यह कहर अत्यंत दुखद और चिंताजनक है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने अफीम, गेहूं, सरसों, धनिया, अलसी, चिया सीड, मेथी, मसूर, चना सहित सभी प्रमुख फसलों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। यह फसलें किसानों की वर्ष भर की मेहनत, निवेश और परिवार की आजीविका का आधार होती हैं, और इनके एकाएक बर्बाद हो जाने से हजारों परिवार संकट में पड़ गए हैं।
जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष  महेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित सभी किसान भाइयों के साथ पूर्ण एकजुटता और संवेदना व्यक्त करता हूं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब फसलें कटाई के लिए तैयार थीं, तब प्रकृति ने ऐसी मार मारी। विशेष रूप से अफीम की खेती, जो इस क्षेत्र की प्रमुख और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण फसल है, उसके नुकसान से किसानों की स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्री गुर्जर ने  जिला कलेक्टर एवं  से मांग करते हुए कहा कि
मध्य प्रदेश सरकार तत्काल प्रभाव से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण कराए, जिसमें राजस्व, कृषि और नारकोटिक्स विभाग की संयुक्त टीम शामिल हो।
किसानों को उचित और त्वरित मुआवजा प्रदान किया जाए। नुकसान की गंभीरता को देखते हुए मुआवजा राशि न्यूनतम 1.5 से 2 लाख रुपये प्रति एकड़ या फसल के मूल्यांकन के अनुसार होनी चाहिए, ताकि किसान अगली बुआई के लिए सक्षम हो सकें।
नारकोटिक्स विभाग अफीम उत्पादकों को विशेष राहत प्रदान करे, जिसमें लाइसेंस शुल्क में छूट, उत्पादन लक्ष्य में समायोजन और मुआवजे की अतिरिक्त राशि शामिल हो, क्योंकि अफीम की खेती नियंत्रित और सरकारी नीति के तहत होती है।
प्रभावित किसानों के कर्ज पर ब्याज माफी और फसल बीमा क्लेम की त्वरित प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
कांग्रेस पार्टी हमेशा किसानों के साथ खड़ी रही है और रहेगी। मैंने पार्टी स्तर पर इस मुद्दे को उठाया है और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। यदि सरकार संवेदनशीलता नहीं दिखाती, तो हम किसानों के साथ मिलकर शांतिपूर्ण आंदोलन और कानूनी रास्ते अपनाने को बाध्य होंगे।
किसान भाइयों, हिम्मत न हारें। आपकी आवाज सुनी जाएगी। हम सब मिलकर इस संकट से उबरेंगे।

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