एसएलपी, दस्तावेजों से वकालतनामे तक में कमियां, रजिस्ट्री की आपत्तियों के चलते लिस्ट नहीं हो सकी याचिका
भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता कमलनाथ ने दावा किया कि प्रदेश की जनता भाजपा को ओबीसी विरोधी और आरक्षण खत्म करने के लिए जिम्मेदार मान रही है।
मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने से पहले ही तकनीकी अड़चनों में उलझ गया है। जबलपुर हाईकोर्ट के 9 अक्टूबर के फैसले को चुनौती देने के लिए राज्य सरकार की ओर से दाखिल विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने करीब 10 खामियां दर्ज की हैं। इन आपत्तियों के चलते याचिका फिलहाल सुनवाई के लिए लिस्ट नहीं हो सकी है।
रजिस्ट्री की आपत्तियों में याचिका के कवर पेज, इंडेक्स और संबंधित दस्तावेजों में दर्ज तारीखों में अंतर बताया गया है। इसके अलावा पेजिनेशन दुरुस्त करने और हाईकोर्ट के संबंधित न्यायाधीशों के नाम दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। याचिका के पेज नंबर 1 से 11 और 13 पर संलग्न दस्तावेजों की प्रतियां अस्पष्ट पाए जाने पर उनकी स्पष्ट एवं टाइप की हुई प्रतियां मांगी गई हैं। वहीं रंगीन चार्ट और जानकारी वाले पन्नों की चार अलग-अलग प्रतियां प्रस्तुत करने को कहा गया है।
रजिस्ट्री ने पेज नंबर 18 की तारीख में अंतर, अन्य आवेदनों की पेज नंबरिंग में गड़बड़ी तथा पेज 392-393 की अस्पष्ट प्रतियों पर भी आपत्ति दर्ज की है। इसके साथ ही वकालतनामे में आवश्यक ‘आइडेंटिफाइड’ और ‘सर्टिफाइड’ जैसे उल्लेख नहीं होने तथा एक अन्य याचिकाकर्ता के हस्ताक्षर नहीं होने की बात भी सामने आई है।
कमलनाथ ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता कमलनाथ ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण की लड़ाई शुरू होने से पहले ही सरकार की ओर से लापरवाही बरती जा रही है। कमलनाथ ने कहा कि ैस्च् में शुरुआत में ही इतनी खामियां रह गई हैं कि याचिका सुनवाई के लिए आगे नहीं बढ़ सकी।
कमलनाथ ने अपने बयान में आरोप लगाया कि वर्ष 2019 में उनकी सरकार द्वारा ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के बाद से ही भाजपा इसे समाप्त करने की साजिश कर रही है। उन्होंने सरकारी भर्तियों में 13 प्रतिशत पद होल्ड रखने के फार्मूले को लेकर भी भाजपा सरकार पर सवाल उठाए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में मामले से संबंधित आवश्यक दस्तावेज और ओबीसी की जनसंख्या से जुड़े आधिकारिक आंकड़े उचित तरीके से प्रस्तुत नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट में भी इसी तरह की लापरवाही की जा रही है।
कमलनाथ ने दावा किया कि प्रदेश की जनता भाजपा को ओबीसी विरोधी और आरक्षण खत्म करने के लिए जिम्मेदार मान रही है। हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।