भोपाल के ऐशबाग थाने में टीआई जितेंद्र गढ़वाल के खिलाफ उसी थाने मे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुई एफआईआर
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के ऐशबाग थाने में पदस्थ टाउन इंस्पेक्टर जितेंद्र गढ़वाल, असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर पवन रघुवंशी और हेड कांस्टेबल धर्मेंद्र के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में पुलिस को रिश्वत देने वाली मोना जैन को भी आरोपी बनाया गया है। इससे पहले भोपाल पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्रा ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया था।
मामला उत्तर प्रदेश पुलिस के इनपुट पर भोपाल में पकड़े गए एक कॉल सेंटर का है। यहां से देश भर में लोगों को शेयर मार्केट में रात और रात लाखों की कमाई का लालच देकर, ठगी का शिकार बनाया जाता था। इस मामले के मुख्य आरोपियों को बचाने के लिए एएसआई पवन रघुवंशी ने 25 लाख रुपये में डील की थी। एएसआई पवन रघुवंशी ने उस डील की पहली किस्त के रूप में 5 लाख रुपये जैसे ही प्राप्त किए पुलिस की क्राइम ब्रांच और जोन-1 की एडिशनल डीसीपी रश्मि मिश्रा की अगुवाई में पुलिस टीम ने एएसआई को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
इसके बाद जब मामले की जांच की गई तो ऐशबाग थाना टीआई जितेंद्र गढ़वाल की भी संलिप्तता सामने आई है। टीआई गढ़वाल की जानकारी में ही यह पूरा घटनाक्रम हुआ था। यही नहीं, रिश्वत के इस मामले में उनकी भूमिका इतनी गंभीर थी कि उनके खिलाफ भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। जिस ऐशबाग थाने में जितेंद्र गढ़वाल टीआई (सबसे बड़े अधिकारी) के रूप में पदस्थ थे, उसी थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले में टीआई जितेंद्र गढ़वाल के अलावा, एएसआई पवन रघुवंशी, प्रधान आरक्षक धर्मेंद्र और रिश्वत देने वाले अंशुल उर्फ मोना जैन को भी आरोपी बनाया गया है।
भोपाल पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्रा ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए ऐशबाग थाने के टीआई जितेंद्र गढ़वाल, एएसआई पवन रघुवंशी और दो अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई कॉल सेंटर के संचालक पर FIR दर्ज करने में की गई देरी के कारण हुई है।