लाड़ली बहना योजना के खिलाफ मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में जनहित याचिका, सरकार से 4 सप्ताह में जवाब
भोपाल/ ग्वालियर। मध्यप्रदेश की लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं को दी जा रही रू.1500 की मासिक सहायता पर रोक लगाने की मांग को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की गई है।
ग्वालियर के थाटीपुर निवासी और वार्ड-22 की पूर्व कांग्रेस पार्षद सुधा दुबे ने अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा के माध्यम से याचिका दायर की है। याचिका में मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा वित्त विभाग के प्रमुख सचिवों को पक्षकार बनाया गया है।
याचिकाकर्ता ने योजना को असंवैधानिक बताते हुए इसे निरस्त करने और महिलाओं को दी जा रही नगद सहायता पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि महिलाओं को सीधे नकद राशि देने के बजाय रोजगार, कौशल विकास, वोकेशनल ट्रेनिंग और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
याचिका में दावा किया गया है कि वर्तमान में 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को हर महीने रू.1500 की सहायता दी जा रही है। इसके चलते राज्य सरकार पर प्रतिमाह करीब रू.1878 करोड़ और सालाना रू.22,500 करोड़ से अधिक का वित्तीय भार पड़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में लाड़ली बहना योजना के लिए रू.23,882 करोड़ का प्रावधान किए जाने का भी उल्लेख याचिका में किया गया है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से आपत्ति उठाई गई कि योजना की लाभार्थी सवा करोड़ से अधिक महिलाओं को याचिका में पक्षकार नहीं बनाया गया है। इस पर हाईकोर्ट ने शासन को लाभार्थियों की सूची अदालत में प्रस्तुत करने और याचिका की प्रति शासन के माध्यम से लाभार्थियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
ग्वालियर खंडपीठ ने महिला एवं बाल विकास विभाग को मामले में जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद याचिका में की गई अंतरिम रोक सहित अन्य मांगों पर आगे सुनवाई होगी।
बतदें, फिलहाल हाईकोर्ट ने रू.1500 की मासिक किस्त बंद करने का कोई आदेश जारी नहीं किया है।